शुक्रवार, 9 जुलाई 2010

गेरुए पन्ने

इस ब्लॉग का नाम ' गेरुए पन्ने ' ही क्युं रखा ...मेरे कई मित्रों ने मुझसे यह पूछा है । इसके पीछे कई कारण हैं , मुख्य कारण यह है कि मैं मुख्यतः अध्यात्म के सम्बन्ध में ही लिखना चाह रही थी और भारत में एक सन्यासी गेरुआ वस्त्र ही धारण करता है . गेरुआ रंग अध्यात्म से सम्बंधित व प्रतीक माना जाता है लेकिन फिर ' भगवा रंग ' क्युं नहीं चुना ...??? क्युंकी भगवा रंग भी भगवत्ता का ही प्रतीक होता है । इसका कारण यह है कि भगवत्ता तो कण कण में व्याप्त है और भगवत्ता का अक्सर ' अवतरण ' माना जाता है । अर्थात भगवत्ता... कहीं सुदूर अन्तरिक्ष .... किसी अज्ञात लोक से उतरती हुई मानी जाती है और गेरुआ रंग ..गेरू मिट्टी से बनाया जाता है । यह रंग 'मिटटी ' से जुड़ा हुआ है । इसमें यह संकेत है कि भारत का अध्यात्म जमीन से जुड़ा हुआ है ...वह ' आसमानों ' की अगर बात कर भी रहा है तो उसके पैर जमीन में मजबूती से जमे हुए हैं । भारत के आध्यात्मिक ज्ञान के ऊपर अक्सर यह प्रश्न खड़ा किया जाता है कि भारत का धर्म , अध्यात्म या फिर संस्कृति जिन आधारों पर खडी है वे काल्पनिक ज्यादा हैं , यथार्थ से कम सम्बन्ध है उसका । यह सब गलत प्रचार है भारत के आध्यात्मिक ज्ञान व संस्कृति के प्रति । इसलिए भी मैंने इस ब्लॉग का नाम ' गेरुए पन्ने ' रखा ,यह संकेत है कि भारत का आध्यात्मिक ज्ञान यथार्थ ज्ञान है , व्यवहारिक है एवं इस भूमि पर पूरी शक्ति के साथ खड़ा है । आने वाले दिनों में मैं पूर्ण प्रयास करूंगी कि भारत के तमाम कर्म कांडों , आध्यात्मिक साधनाओं के पीछे क्या तथ्य हैं ...क्या रहस्य हैं ...वह आप सभी के सामने आ सकें । और मुझे आप सभी का यह सहयोग चाहिए कि आप भी अपने चिंतन बिन्दुओं से मुझे जरूर अवगत करायेंगे , प्रश्न भी जरूर पूछेंगे ...मेरा प्रयास यह है कि हम सभी मित्रों के बीच एक संवाद निर्मित हो ....हम लोग पुनर्विचार करें इस देश की संस्कृति , धर्म व् अध्यात्म के बारे में । इस बात कि चिन्तना न करें कि उन प्रश्नों के उत्तर मुझे आते हैं या नहीं ....या किसी और को आते हैं या नहीं .....प्रश्न पूछे भी और साथ ही साथ उत्तरों को स्वं भी खोजे ....
कई और भी कारण हैं गेरुए पन्ने नाम रखने के पीछे ......उगते सूर्य का रंग भी गेरुआ होता है ....यह एक प्रार्थना है मेरी परमात्मा से कि हम सब के आतंरिक जीवन में ईश्वरीय सूर्य का जन्म हो ........ गेरुआ रंग गति का प्रतीक है ...हम सब का जीवन गतिशील बने लेकिन शुभत्व की दिशा में .........गेरुआ रंग अनासक्ति का भी प्रतीक होता है हम सभी अपने जीवन के सारे कर्तव्यों को अनासक्ति के साथ पूर्ण करे ....न आसक्ति के साथ ..और ना ही विरक्ति के साथ .....ग्रामीण अंचलों में किसी भी शुभ अवसर पर घर के बाहर ' गेरू ' से अल्पनायें बनाई जाती हैं ....अर्थात हम सबके आतंरिक एवं बाह्य जीवन में भी शुभत्व आये....
एक अंतिम बात और .....इस ब्लॉग को मैंने प्रारम्भ जरूर किया है लेकिन यह सिर्फ मेरा ब्लॉग नहीं है ....यह हम सबका ब्लॉग है ....अगर कोई मित्र किसी विषय पर कोई गंभीर जानकारी किसी लेख के माध्यम से हम सबके बीच रखना चाहते हैं तो वे मुझे जरूर अवगत करायें ....वह लेख उनके नाम के उल्लेख के साथ जरूर पोस्ट करूंगी
हाँ ...यदि किसी विशेष विषय पर मेरा कोई लेख चाह रहे हूँ तो भी अवश्य बतायें ..अगर वह विषय मेरे अधिकार क्षेत्र के भीतर है तो उस पर अवश्य लिखूंगी । आप सभी के जीवन में अनंत आनंद एवं अध्यात्म आये .......
.......सस्नेह
....अनामिका .

1 टिप्पणी:

  1. Dear Ana,

    I love this article and the reasoning given to by you for namakaran was quite applaudable. I wish to share something here. When this is the matter of something related to occult, unknown and spiritual world, where a few people ( like the reverend Guru found by virtue of your fate in Lucknow which you have refered to in the first blog) only knew a lot which we can wonder how did they do this. Further I read somewhere that Hanuman ji once asked SITA MAIYA as to why she is putting vermillon ( Sindur) on her head. Maa Sita smiled and since had no real answer replied that " by applying vermillon on head, I am increasing the life span of my swami shri ramchandra bhagwan". Hearing this hanuman ji thought Prabhu Ramm is also my lord ( swami) so he went out and took a bag full of sindur and virtually painted himself. seeing that everyone in the sabha was laughing but Prabhu then explained the innoncence of hanumanji and said that this is the impeccable love and respect of the devotee for his God. Kahetey hein ki tab se hanuman ji ko sindur ka lep chdhaya jata hey.So gerue ka mahatva to hey. Mujhe halanki ye lal lag raha hey. agar gerua karo to sone pe suhaga hoga. just a suggestion. Baaki tum khud hi samajdar ho. Haan blog ke liye dher saari badhaiyan. You will certainly attain something unique in coming times/years. Chunki kai baar mujeh log kahte hein ki tum soch samaj kar bola karo kyonki aksar tumhari baat sach hoti hein. Per jab tumhare baare me ana, jo upar likha use mein dil se chahta hoon ki sach ho. Yaar tum kuchh attain karogi tau tumhare saanidhya mein ( halanki ye email ya yahan mil raha hey) mujh gariib ka kuchh to bhala hoga. Luv n lots of luv. I am happy and really very happy on your this endeavur. luv shharad

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