माँ ,
मैं अभी आई नहीं
तुम्हारी दुनिया में , ना ही
जानती हूँ भाषा तुम्हारे देस की
ना ही व्याकरण ,
ना रस , छंद , अलंकार
ना ही पर्याय ,
किन्तु सुना है मैंने
जीवन का 'रस ' होती है ' बेटी ',
माँ - पिता का जीवन ' छंदमय ' हो जाता है
एक बेटी के आने से ,
परिवार का ' अलंकार '
होती है ' बेटी '।
और , यह भी सुना है मैंने
कई ' पर्याय ' हैं मेरे ' नाम ' के
मैं 'पुत्री ' हूँ ...
क्यूंकि ' प्राप्ति ' हूँ तुम्हारी ,
' दुहिता ' हूँ ...
सबके ' हितों ' की रक्षक ,
'तनया ' हूँ मैं ...
तन के रक्त से बनी हूँ तुम्हारे ,
' तनूजा ' हूँ तुम्हारी ...
तुम्हारी ही काया का एक अंश हूँ मैं ।
'आत्मजा ' भी हूँ मैं ....
तुम्हारे आत्म से निर्मित ।
माँ ,
इतने पर्याय हैं मेरे ,
किसी एक पर्याय के लिए तो ,
मुझे जीवित रहने दो ......
मुझे मत मारो , माँ ...... ।
Dear Ana,
जवाब देंहटाएंshare kar raha hoon.....
ek baat yaad aa gai...
Beta jab shaam ko thaka hara ghar lauta hey to::
Pita - Kuchh bachaya kya????
Kids - papa Kuchh laya kya????
Patni - Kuchh Kamaya Kya ???????
SIRF,
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MAA
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hi puchchti hey
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BETA KUCH KHAYA KYA ?????????
Luv
shharad
Dear Ana,
जवाब देंहटाएंHalanki tumahara lekh ek ajanmi beti ke vishay mein hey fir bhi mene ek MAA ke bare mein likha jo kafi satik jaan padta hey.
luv
shharad
Nice..
जवाब देंहटाएंbahut hi sundar kavita.. padwaane k liye shukriya..
जवाब देंहटाएंMeri nayi kavita : Tera saath hi bada pyara hai..(तेरा साथ ही बड़ा प्यारा है ..)
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